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68500 प्राइमरी शिक्षको की भर्ती परीक्षा से होगा प्रतियोगी परीक्षाओ में बड़ा बदलाव , पहली बार सब्जेक्टिव इम्तिहान की उत्तरकुंजी कोई परीक्षा संस्था जारी करेगी , क्लिक करे और पढ़े

68500 प्राइमरी शिक्षको की भर्ती परीक्षा से होगा प्रतियोगी परीक्षाओ में बड़ा बदलाव :सहायक अध्यापकों की पहली बार होने जा रही लिखित परीक्षा प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े बदलाव का कारक भी बनने जा रही है। ऐसा भी पहली बार होने जा रहा है कि सब्जेक्टिव इम्तिहान की उत्तरकुंजी कोई परीक्षा संस्था जारी करेगी। इसके मूल में परीक्षा की पारदर्शिता है, ताकि हर अभ्यर्थी को यह पता रहे कि फलां सवाल का उसने जो जवाब लिखा है वह सही है या नहीं। यही नहीं, इस परीक्षा के प्रश्नों का विकल्प नहीं दिया जाना है, उसके बाद भी जवाब एक ही होगा। ऐसे में प्रश्नपत्र बनाने का कार्य भी चुनौती भरा है।

बेसिक शिक्षा परिषद के 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा 12 मार्च को होनी है। शासन ने इसकी गाइड लाइन व परीक्षा संस्था तय कर दिया है। इस परीक्षा में अर्हता अंक भी तय किए गए हैं, यानी सामान्य वर्ग 45 फीसदी व एससी/एसटी का अभ्यर्थी 40 फीसदी से कम आने पर अनुत्तीर्ण होगा। उसे प्रमाणपत्र भी निर्गत नहीं किया जाएगा। यह परीक्षा ही शिक्षक भर्ती का मुख्य आधार होनी है, ऐसे में हर अभ्यर्थी के लिए एक-एक अंक काफी अहम होगा।

शासन यह परीक्षा ओएमआर शीट पर नहीं करा रहा है, बल्कि अति लघु उत्तरीय प्रश्नों का जवाब लिखकर देना है, ताकि भावी शिक्षकों के लेखन ज्ञान का पता चल सके। प्रश्नपत्र इस तरह से तैयार होगा कि हर सवाल के नीचे लिखने की जगह दी जाएगी। तैयारी यह भी है कि पूछे जाने वाले प्रश्नों का जवाब ऐसा हो कि वह एक या दो लाइन में न लिखा जाए, बल्कि दो या तीन शब्दों में ही हल निकल आए। इसी को ध्यान में रखकर प्रश्नपत्र तैयार हो रहा है। शासन ने इसकी उत्तरकुंजी जारी करने का निर्देश दिया है, ताकि परीक्षार्थियों को पता रहे कि संबंधित का जवाब प्रश्न का जवाब यह है। इससे वह परिणाम आने से पहले ही मिलने वाले अंकों का भी अनुमान लगा सकेंगे।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि उत्तरकुंजी जारी होने और उस पर आपत्तियां लेकर निस्तारण करने के बाद मूल्यांकन करने में भी विभाग को सहूलियत रहेगी और परीक्षा संस्था पर कोई सवाल भी नहीं उठेगा। असल में प्रतियोगी इस परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी होने की आशंका जता रहे थे, उसे खत्म करने के लिए ही यह निर्णय हुआ है।

डुप्लीकेट कॉपी देने पर विचार :
टीईटी की तर्ज पर हर परीक्षार्थी को डुप्लीकेट कॉपी मुहैया कराने पर भी विभाग विचार कर रहा है। इस पर सहमति बनने पर शासन से अनुमति लेकर यह कदम भी उठाया जा सकता है। इससे भी पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

पीसीएस में लंबे समय से मांग :
उप्र लोकसेवा आयोग की मुख्य परीक्षा सब्जेक्टिव होती है, उसकी उत्तरकुंजी जारी करने पर लंबे समय से मांग हो रही है। अब तक इस पर निर्णय नहीं हो सका है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि मूल्यांकन में अपनों के चयन का खेल होता है।

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